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1 | Heading (Hindi) : छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प! ₹500 करोड़ का मिशन, 1000 नए पर्यटन उद्यमी बनाने का लक्ष्य
Heading (English) :
Category (Hindi) : छत्तीसगढ
Category (English) : Chhattisgarh
Status : Active
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Create Date : 14-10-2026
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की खूबसूरत वादियों, झरनों, ऐतिहासिक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति को अब नई पहचान देने की तैयारी है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत बड़े स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। पहले चरण में चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मिशन की कार्ययोजना की समीक्षा की। इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का माध्यम बनाना भी है।
चित्रकोट से मैनपाट तक बदलेगी पर्यटन की तस्वीर
छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित चित्रकोट जलप्रपात को देश के नियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, सरगुजा का मैनपाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और तिब्बती संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत के कारण विशेष पहचान रखता है।
इन प्रमुख स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। इसके साथ ही हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को भी पहले चरण में विकसित किया जाएगा।
योजना के तहत बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, व्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि पर्यटकों को इन स्थलों पर पहुंचने से लेकर वहां ठहरने और स्थानीय पर्यटन का अनुभव लेने तक बेहतर सुविधाएं मिलें।
₹500 करोड़ की मूल मिशन निधि, अतिरिक्त निवेश जुटाने की तैयारी
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपये की मूल मिशन निधि प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
इस निवेश का उद्देश्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना और उन्हें पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित निवेश कितनी तेजी से धरातल पर उतरता है और पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विकास किस स्तर तक होता है।
मयाली-बगीचा से तीरथगढ़ तक पर्यटन का विस्तार
पहले चरण के पांच प्रमुख स्थलों के अलावा प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इनमें मयाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी शामिल हैं।
इन क्षेत्रों की प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए विकास की योजना बनाई जाएगी।
पर्यटन स्थलों पर स्थानीय वास्तुकला और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि विकास के नाम पर इन स्थानों की मूल पहचान प्रभावित न हो।
1000 नए पर्यटन उद्यमी, 250 महिला समूहों को मिलेगा अवसर
इस मिशन का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। योजना के तहत एक हजार नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
साथ ही 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों और 500 टूर गाइड तथा फ्रंटलाइन कर्मियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, पर्यटन मार्गदर्शन और परिवहन जैसी सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। वहीं, महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्थानीय उत्पादों, खानपान और हस्तशिल्प के माध्यम से आय अर्जित करने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
मुख्यमंत्री साय का जोर—स्थानीय लोगों को मिले सीधा लाभ
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यटन का विकास केवल किसी स्थान के सौंदर्यीकरण या अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।
उन्होंने पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर दिया।
स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, लोककला और संस्कृति को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़कर आय के नए साधन विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
बड़ा सवाल—क्या छत्तीसगढ़ बनेगा देश का प्रमुख पर्यटन केंद्र?
छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात, जंगल, ऐतिहासिक धरोहरें और समृद्ध जनजातीय संस्कृति जैसी पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जरूरत है बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं और प्रभावी प्रचार-प्रसार की।
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन इन संभावनाओं को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होगी, जब प्रस्तावित योजनाएं जमीन पर उतरेंगी, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं, महिलाओं तथा छोटे कारोबारियों की आय में वास्तविक सुधार दिखाई देगा।
2 | Heading (Hindi) : 41 साल से गुजरात में कांग्रेस नहीं जीती, क्या यह भी SIR का नतीजा? : अमित शाह
Heading (English) :
Category (Hindi) : राजनीति
Category (English) : Politics
Status : Active
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Create Date : 14-10-2026
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नई दिल्ली। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शानदार प्रदर्शन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। शाह ने कांग्रेस की चुनावी हार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पार्टी गुजरात में 41 साल से चुनाव नहीं जीत पाई, तो क्या इसके लिए भी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
अमित शाह ने कांग्रेस को चुनावी नतीजों से सबक लेने और अपनी राजनीतिक रणनीति पर आत्ममंथन करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बड़ी जीत हासिल करेगा।
गुजरात में BJP का शानदार प्रदर्शन
अमित शाह के मुताबिक, गुजरात में तीन स्थानीय निकायों की कुल 104 सीटों में से बीजेपी ने 90 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों में से 38 सीटें बीजेपी के खाते में गईं।
शाह ने दावा किया कि गांधीनगर में बीजेपी का वोट शेयर पिछले चुनाव की तुलना में 10 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने चुनावी नतीजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों के प्रति जनता के समर्थन का संकेत बताया।
इस प्रदर्शन के आधार पर गृह मंत्री ने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा।
SIR पर राहुल गांधी को घेरा
चुनावी नतीजों के बाद अमित शाह के निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी रहे। उन्होंने SIR को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपनी हार के लिए चुनावी प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपने प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए।
शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी SIR के मुद्दे के जरिए घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अमित शाह का राजनीतिक आरोप है, जिस पर कांग्रेस का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
गृह मंत्री ने गुजरात के साथ पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में कांग्रेस के कमजोर चुनावी प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को लगातार मिल रही चुनावी हार से सबक लेते हुए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है।
EVM के बजाय बैलेट पेपर का भी दिया उदाहरण
अमित शाह ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर उठने वाले सवालों पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी बीजेपी जीत हासिल कर चुकी है।
उनके इस तर्क का उद्देश्य विपक्ष के उन आरोपों पर सवाल उठाना था, जिनमें चुनावी प्रक्रिया और EVM की विश्वसनीयता को लेकर संदेह जताया जाता रहा है।
शाह ने संकेत दिया कि चुनावी हार का कारण केवल चुनाव प्रणाली को बताने के बजाय राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति और जनसमर्थन का आकलन करना चाहिए।
2029 के चुनाव को लेकर अमित शाह का बड़ा दावा
अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि NDA आगामी आम चुनाव में भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगा।
शाह ने कांग्रेस को नकारात्मक राजनीति छोड़कर जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी। उनके बयान से साफ है कि बीजेपी आगामी चुनावों को लेकर विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
चुनावी जीत के बाद सियासी बयानबाजी तेज
गुजरात निकाय चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर बीजेपी अपने प्रदर्शन को जनता के समर्थन के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी ओर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में बहस का विषय बने हुए हैं।
अब सवाल यह है कि क्या गुजरात में बीजेपी की जीत का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा? और क्या कांग्रेस अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करेगी? इन सवालों के जवाब आने वाले चुनावों और दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियों से सामने आएंगे।
3 | Heading (Hindi) : VB-G RAM G के तकनीकी सहायकों का हल्ला बोल, नियमितीकरण समेत 3 मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे
Heading (English) :
Category (Hindi) : छत्तीसगढ
Category (English) : Chhattisgarh
Status : Active
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Create Date : 14-10-2026
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकसित भारत जी राम जी (VB-G RAM G) योजना के तहत कार्यरत तकनीकी सहायक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर 13 से 15 अक्टूबर तक तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल और धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। यह आंदोलन प्रदेश के सभी 33 जिलों में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।
तकनीकी सहायकों ने नियमितीकरण, नियमित पदों के सृजन और सेवा शर्तों में सुधार समेत तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों ने अपने कार्यों से जुड़ी चार सूत्रीय समस्याओं के समाधान की मांग भी उठाई है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवसीय आंदोलन के बाद भी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
नियमितीकरण और पदनाम परिवर्तन की मांग
छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ की प्रमुख मांग है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत विकसित भारत जी राम जी योजना में कार्यरत सभी तकनीकी सहायकों के लिए नियमित पदों का सृजन किया जाए और उन्हें उन पदों पर समायोजित किया जाए।
संघ का कहना है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक तकनीकी सहायकों की सेवा शर्तों के निर्धारण के लिए ग्राम पंचायत सचिवों की तरह स्थायीकरण नियमावली तत्काल लागू की जाए।
इसके अलावा तकनीकी सहायकों ने अपने वर्तमान पदनाम को बदलकर 'कनिष्ठ अभियंता (VB-G RAM G)' किए जाने की मांग की है। संघ का तर्क है कि तकनीकी जिम्मेदारियों और कार्यों के अनुरूप कर्मचारियों को पदनाम और सेवा संबंधी स्पष्टता मिलनी चाहिए।
काम के दबाव और मानसिक तनाव का लगाया आरोप
संघ ने योजना के क्रियान्वयन में कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि मूल रूप से मांग आधारित रोजगार योजना को लक्ष्य आधारित बनाकर तकनीकी सहायकों पर अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है।
संघ के अनुसार, निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी तकनीकी सहायकों पर डाल दी जाती है। वहीं, उनके मूल तकनीकी कार्यों के अतिरिक्त अन्य जिम्मेदारियां भी सौंपी जाती हैं। इससे कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना की जिम्मेदारी सौंपने पर आपत्ति
तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास निर्माण पूरा कराने की जिम्मेदारी को लेकर भी आपत्ति जताई है।
संघ का कहना है कि आवास निर्माण की निगरानी और क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक अलग व्यवस्था और अमला मौजूद है। इसके बावजूद वीबी-जी राम जी योजना में कार्यरत तकनीकी सहायकों पर आवास निर्माण पूरा कराने का दबाव बनाया जाता है।
संघ का आरोप है कि जिला और जनपद स्तर पर आवास निर्माण के साप्ताहिक लक्ष्य तय किए जाते हैं और उनकी पूर्ति की जिम्मेदारी तकनीकी सहायकों पर डाल दी जाती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भौतिक बैठकों के माध्यम से लक्ष्य दिए जाते हैं। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर सेवा से बर्खास्त करने, वेतन काटने या रोकने जैसी चेतावनियां मिलने का भी आरोप लगाया गया है।
संघ के मुताबिक, इस स्थिति से कर्मचारी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं और उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें उनके निर्धारित दायित्वों के अनुसार ही कार्य सौंपे जाएं और जवाबदेही की व्यवस्था स्पष्ट की जाए।
तकनीकी कार्यों के बावजूद काम नहीं करने की टिप्पणी पर नाराजगी
संघ ने तकनीकी सहायकों के कामकाज को लेकर जिला और जनपद स्तर पर की जाने वाली कथित नकारात्मक टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई है।
कर्मचारी संघ के अनुसार, योजना के अंतर्गत वीजीपीपी, युक्तधारा, सिक्योर और ए-एमबी जैसी तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से विभिन्न कार्य किए जाते हैं। निर्माण कार्यों का मूल्यांकन भी ऑनलाइन और ऑफलाइन निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है।
संघ का कहना है कि इन तकनीकी और कार्यालयीन जिम्मेदारियों को पूरा करने में कर्मचारियों का अधिकांश समय लग जाता है। इसके बावजूद उनके काम नहीं करने संबंधी टिप्पणियां और रिपोर्ट भेजे जाने से उनकी छवि प्रभावित होती है।
कर्मचारी संघ ने मांग की है कि तकनीकी सहायकों के कार्यों का मूल्यांकन वास्तविक जिम्मेदारियों और कार्यभार के आधार पर किया जाए। साथ ही, मूल दायित्वों से अलग काम सौंपकर बाद में काम नहीं करने का आरोप लगाने की स्थिति पर रोक लगाई जाए।
संघ अध्यक्ष शिव शंकर ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शिव शंकर ने कहा कि कर्मचारियों से नियमितीकरण का वादा किया गया था, इसलिए सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत विकसित भारत जी राम जी योजना में कार्यरत सभी तकनीकी सहायकों के नियमित पद सृजित कर उनका समायोजन किया जाए। नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक ग्राम पंचायत सचिवों की तरह स्थायीकरण नियमावली लागू की जाए और तकनीकी सहायक का पदनाम बदलकर कनिष्ठ अभियंता (VB-G RAM G) किया जाए।
अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के बाद भी कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाएगा।
अब सरकार के रुख पर टिकी निगाहें
प्रदेशभर में चल रहे इस आंदोलन के बीच अब निगाहें राज्य सरकार और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और कार्यभार से जुड़ी हैं।
यदि आंदोलन के दौरान मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो तकनीकी सहायकों का आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संघ के बीच बातचीत तथा संभावित निर्णय इस विवाद की दिशा तय करेंगे।