SCGNEWS : लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में छात्रों के साथ संवाद करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था, युवाओं पर बढ़ते मानसिक दबाव और सीमित करियर विकल्पों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। वहीं दूसरी ओर, नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है।
कोटा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा संवाद है। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देशभर के युवाओं से बातचीत में उन्हें बार-बार केवल पांच करियर विकल्प सुनने को मिले—इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, आईएएस और सशस्त्र बल। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर भारतीय शिक्षा व्यवस्था युवाओं के सामने इतने सीमित विकल्प ही क्यों प्रस्तुत करती है।
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली बच्चों के सपनों और उनकी व्यक्तिगत रुचियों को पर्याप्त महत्व नहीं देती। हर छात्र की अपनी अलग क्षमता और प्रतिभा होती है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था अक्सर उन्हें तयशुदा रास्तों पर चलने के लिए मजबूर करती है। उन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था के कमजोर होने और निजी शिक्षा के लगातार महंगे होते जाने पर भी चिंता व्यक्त की।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली युवाओं पर अत्यधिक दबाव डाल रही है। यह तनाव पैदा करती है और कई बार छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ देती है। कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहां कोई भी छात्र आत्महत्या के बारे में सोचने को मजबूर न हो।
इसी बीच, शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर एक और बड़ा मामला सामने आया है। नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी की ओर से अदालत में कहा गया कि इस कार्रवाई से देशभर के 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं।
हालांकि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का कहना है कि 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। एजेंसी के अनुसार, संगठित नकल गिरोह मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को गुमराह करने और परीक्षा की गोपनीयता भंग करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते सार्वजनिक हित में अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया।
एक ओर राहुल गांधी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों की मानसिक स्थिति और उनके सपनों को महत्व देने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार और एजेंसियां सख्त कदम उठा रही हैं। ऐसे में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गए हैं।