scgnews (लाइफ वर्सिटी) : हिंदू धर्म में नवरात्र का पर्व साल में चार बार आता है. इनमें दो नवरात्र विशेष होती हैं और दो गुप्त नवरात्र होती हैं. चैत्र और शारदीय नवरात्र को प्रत्यक्ष नवरात्र कहा जाता है, जिनमें भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं.
वहीं आषाढ़ और माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्र में साधक दस महाविद्याओं की तांत्रिक साधना करते हैं. चैत्र नवरात्र की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत हिंदू नववर्ष के साथ होती है. इसलिए यह पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से होगी. नवरात्र की शुरुआत और समापन जिस दिन (वार) पर होता है, उसी के आधार पर माता दुर्गा की आने और जाने की सवारी निर्धारित मानी जाती है. हालांकि, मां दुर्गा का मुख्य वाहन शेर होता है, लेकिन मान्यता है कि नवरात्र के दौरान जब मां पृथ्वी पर आती हैं, तो वे अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती और जाती हैं.
हर सवारी का अपना एक विशेष संकेत होता है, जो समाज, मौसम, सुख-समृद्धि और भविष्य की स्थितियों के बारे में इशारा देता है. इसलिए हर साल भक्त माता की सवारी को खास ध्यान से देखते हैं. चैत्र नवरात्र 2026 की शुरुआत गुरुवार से हो रही है, इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा इस बार पालकी (डोली) में सवार होकर आएंगी.
शास्त्रों और देवी पुराण के अनुसार, मां का पालकी पर आना ज्यादा शुभ नहीं माना जाता है. इसे एक संकेत के रूप में देखा जाता है, जो आने वाले समय में आर्थिक अस्थिरता, प्राकृतिक परेशानियां या स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों की ओर इशारा कर सकता है.
हालांकि, धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह भी माना जाता है कि अगर नवरात्र के दौरान श्रद्धा, पूजा-पाठ, दान और भक्ति सही तरीके से की जाए, तो नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है. नवरात्र का समापन 27 मार्च 2026, शुक्रवार को होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि नवरात्र का समापन शुक्रवार के दिन होता है तो माता दुर्गा का प्रस्थान हाथी पर माना जाता है. माता का हाथी पर प्रस्थान करना बहुत शुभ माना जा रहा है. हिंदू मान्यताओं में हाथी को समृद्धि, शांति, ताकत और खुशहाली का प्रतीक माना गया है. मान्यता के अनुसार, इसका मतलब होता है कि देश में अच्छी बारिश होगी, खेती अच्छी होगी और आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहने की संभावना रहती है.
चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से
पहला दिन - 19 मार्च : मां शैलपुत्री देवी दूसरा दिन - 20 मार्च : ब्राह्माचारिणी देवी तीसरा दिन - 21 मार्च : चंद्रघंटा देवी चौथा दिन - 22 मार्च : कूष्मांडा देवी पांचवां दिन - 23 मार्च : स्कंदमाता देवी छठा दिन - 24 मार्च : कात्यायनी देवी सातवां दिन - 25 मार्च : मां कालरात्री आठवां दिन - 26 मार्च : महागौरी नौवां दिन - 27 मार्च : सिद्धदात्री देवी