रायपुर। छत्तीसगढ़ की खूबसूरत वादियों, झरनों, ऐतिहासिक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति को अब नई पहचान देने की तैयारी है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत बड़े स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। पहले चरण में चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महानदी भवन मंत्रालय में आयोजित पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मिशन की कार्ययोजना की समीक्षा की। इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का माध्यम बनाना भी है।
चित्रकोट से मैनपाट तक बदलेगी पर्यटन की तस्वीर
छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित चित्रकोट जलप्रपात को देश के नियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, सरगुजा का मैनपाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और तिब्बती संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। सिरपुर अपनी ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत के कारण विशेष पहचान रखता है।
इन प्रमुख स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। इसके साथ ही हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को भी पहले चरण में विकसित किया जाएगा।
योजना के तहत बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, व्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का प्रयास है कि पर्यटकों को इन स्थलों पर पहुंचने से लेकर वहां ठहरने और स्थानीय पर्यटन का अनुभव लेने तक बेहतर सुविधाएं मिलें।
₹500 करोड़ की मूल मिशन निधि, अतिरिक्त निवेश जुटाने की तैयारी
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपये की मूल मिशन निधि प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
इस निवेश का उद्देश्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना और उन्हें पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित निवेश कितनी तेजी से धरातल पर उतरता है और पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विकास किस स्तर तक होता है।
मयाली-बगीचा से तीरथगढ़ तक पर्यटन का विस्तार
पहले चरण के पांच प्रमुख स्थलों के अलावा प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों में भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इनमें मयाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी शामिल हैं।
इन क्षेत्रों की प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए विकास की योजना बनाई जाएगी।
पर्यटन स्थलों पर स्थानीय वास्तुकला और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि विकास के नाम पर इन स्थानों की मूल पहचान प्रभावित न हो।
1000 नए पर्यटन उद्यमी, 250 महिला समूहों को मिलेगा अवसर
इस मिशन का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। योजना के तहत एक हजार नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
साथ ही 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों और 500 टूर गाइड तथा फ्रंटलाइन कर्मियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, पर्यटन मार्गदर्शन और परिवहन जैसी सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। वहीं, महिला स्व-सहायता समूहों के लिए स्थानीय उत्पादों, खानपान और हस्तशिल्प के माध्यम से आय अर्जित करने के नए रास्ते खुल सकते हैं।
मुख्यमंत्री साय का जोर—स्थानीय लोगों को मिले सीधा लाभ
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पर्यटन का विकास केवल किसी स्थान के सौंदर्यीकरण या अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।
उन्होंने पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर दिया।
स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, लोककला और संस्कृति को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़कर आय के नए साधन विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
बड़ा सवाल—क्या छत्तीसगढ़ बनेगा देश का प्रमुख पर्यटन केंद्र?
छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात, जंगल, ऐतिहासिक धरोहरें और समृद्ध जनजातीय संस्कृति जैसी पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जरूरत है बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं और प्रभावी प्रचार-प्रसार की।
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन इन संभावनाओं को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होगी, जब प्रस्तावित योजनाएं जमीन पर उतरेंगी, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय युवाओं, महिलाओं तथा छोटे कारोबारियों की आय में वास्तविक सुधार दिखाई देगा।