कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, राहुल-प्रियंका ने लिए 30 नेताओं के इंटरव्यू


‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ से बाहर निकलकर जमीनी संगठन पर फोकस; 60 फीसदी से ज्यादा मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों को बदलने की तैयारी, युवा और सक्रिय चेहरों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी



नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को नए सिरे से मजबूत करने के लिए अब वरिष्ठता और लंबे राजनीतिक अनुभव के बजाय जमीनी सक्रियता, संगठनात्मक काम और नेतृत्व क्षमता को अधिक महत्व देने की तैयारी है।

कांग्रेस के भीतर चल रही इस कवायद को पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में संभावित पीढ़ीगत बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है, जो चुनावी राजनीति के साथ-साथ संगठन के स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभा सकें।



राष्ट्रीय सचिवों के चयन के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया

कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिवों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने करीब 30 नेताओं के इंटरव्यू लिए। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी इस चयन प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

बताया जा रहा है कि नेताओं को अलग-अलग समूहों में दिल्ली बुलाकर इंटरव्यू लिया जा रहा है। प्रत्येक समूह में करीब 10 नेताओं को शामिल किया जा रहा है।

इंटरव्यू के दौरान नेताओं से उनके पिछले संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव, चुनावी गतिविधियों और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।

खास बात यह है कि पार्टी नेतृत्व के पास उम्मीदवारों के काम का विस्तृत रिकॉर्ड पहले से मौजूद है। ऐसे में चयन केवल इंटरव्यू तक सीमित नहीं होगा, बल्कि नेताओं के पिछले प्रदर्शन और जमीनी सक्रियता को भी अहम आधार बनाया जा सकता है।



60 फीसदी से अधिक मौजूदा सचिवों पर बदलाव की तैयारी?

कांग्रेस राष्ट्रीय संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों में से 60 फीसदी से अधिक चेहरों को बदलने की योजना पर काम चल रहा है।

बताया जा रहा है कि करीब 120 नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम तैयार की जाएगी।

‘संगठन सृजन’ अभियान में ऑब्जर्वर की भूमिका निभा चुके नेताओं को भी चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे नेताओं को संगठन के जमीनी काम और राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों का अनुभव हासिल है।


राहुल गांधी का ‘जनरेशन चेंज’ मॉडल

कांग्रेस संगठन में यह बदलाव राहुल गांधी की लंबे समय से चली आ रही ‘जनरेशन चेंज’ की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी पहले भी पार्टी में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने और नेताओं के चयन में प्रतिभा तथा प्रदर्शन को महत्व देने की वकालत करते रहे हैं। यूथ कांग्रेस और NSUI में इंटरव्यू आधारित चयन का प्रयोग भी इसी सोच का हिस्सा रहा है।

अब इसी मॉडल को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन में व्यापक स्तर पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।

प्रदेश और जिला स्तर पर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद अब राष्ट्रीय संगठन में भी ऐसे नेताओं को आगे लाने की तैयारी है, जिनकी पहचान केवल पार्टी पद से नहीं बल्कि मैदानी काम और राजनीतिक सक्रियता से बनती है।



‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ से जमीनी राजनीति तक?

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि संगठन को लगातार सक्रिय बनाए रखने की भी है।

ऐसे में पार्टी नेतृत्व का जोर ऐसे नेताओं पर है, जो चुनाव के समय ही नहीं बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी जनता, कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठन के बीच सक्रिय रहें।

यदि बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय सचिवों को बदला जाता है तो इसका असर राज्यों में कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज पर भी पड़ सकता है। नई टीम को राज्यों में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और पार्टी के राजनीतिक अभियान को जमीन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मिल सकती है।



क्या कांग्रेस में बदल रही है नेतृत्व की परिभाषा?

कांग्रेस की इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी में अब ‘पद और वरिष्ठता’ से ज्यादा ‘काम और प्रदर्शन’ को नेतृत्व का आधार बनाया जा रहा है?

अगर प्रस्तावित बदलाव उसी दिशा में आगे बढ़ता है, तो कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन का चेहरा आने वाले दिनों में काफी बदल सकता है।

युवा नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां मिलने के साथ पार्टी के भीतर नई राजनीतिक ऊर्जा पैदा करने की कोशिश होगी। हालांकि, यह प्रयोग कितना सफल होता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नए पदाधिकारी संगठन को कितनी मजबूती से जमीन पर सक्रिय कर पाते हैं।

फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की चयन प्रक्रिया जारी है और अंतिम नियुक्तियों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राहुल गांधी की ‘जनरेशन चेंज’ की रणनीति पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में किस रूप में दिखाई देती है।

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